आरम्भ है प्रचंड

द्वारा – शिखा श्रीवास्तव व्यर्थ-सा  है इसके बारे में लिखना .. “ये आरोप प्रत्यारोप का खेल”, जिसने हमें इस कगार पर ला खड़ा किया है कि आज की दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति के लिए तथाकथित बुद्धिजीवी इस वर्ष को ही अशुभ कह देना उचित समझते हैं| शायद इसी विज्ञान के सहारे चल रहा है हमारे देश का विकास.. ऐसा विकास जो हीन-भावना जैसी लाइलाज बीमारी से ग्रस्त … Continue reading आरम्भ है प्रचंड